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mahabharat 1.188.19: अर्जुन और उनके भाई भीमसेन का पराक्रम देखकर, जिनकी बुद्धि अत्यन्त अचिन्त्य है और जिनके कर्म अकल्पनीय हैं, भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भाई बलरामजी से, जो अत्यन्त बलवान थे और प्रकाश को ही अपना अस्त्र मानते थे, यह बात कही -॥19॥   |   mahabharat अध्याय 1.188: द्रुपदको मारनेके लिये उद्यत हुए राजाओंका सामना करनेके लिये भीम और अर्जुनका उद्यत होना और उनके विषयमें भगवान् श्रीकृष्णका बलरामजीसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 188: द्रुपदको मारनेके लिये उद्यत हुए राजाओंका सामना करनेके लिये भीम और अर्जुनका उद्यत होना और उनके विषयमें भगवान् श्रीकृष्णका बलरामजीसे वार्तालाप  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.188.19 
तत् प्रेक्ष्य कर्मातिमनुष्यबुद्धि-
र्जिष्णो: सहभ्रातुरचिन्त्यकर्मा।
दामोदरो भ्रातरमुग्रवीर्यं
हलायुधं वाक्यमिदं बभाषे॥ १९॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन और उनके भाई भीमसेन का पराक्रम देखकर, जिनकी बुद्धि अत्यन्त अचिन्त्य है और जिनके कर्म अकल्पनीय हैं, भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भाई बलरामजी से, जो अत्यन्त बलवान थे और प्रकाश को ही अपना अस्त्र मानते थे, यह बात कही -॥19॥
 
Having seen the heroic deed of Arjun and his brother Bhimasena, Lord Krishna, whose intelligence is beyond the world and whose deeds are unimaginable, said this to His brother Balarama, who was extremely powerful and carried only light as a weapon -॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)