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mahabharat 1.188.18: अर्जुन, जो देवराज इन्द्र के समान विलक्षण बुद्धि, पराक्रमी तथा अकल्पनीय कार्य करने वाले थे, अपने भाई भीमसेन का अद्भुत कार्य देखकर आश्चर्यचकित हो गए। उन्होंने सारा भय त्याग दिया और धनुष लेकर युद्ध के लिए तैयार हो गए।   |   mahabharat अध्याय 1.188: द्रुपदको मारनेके लिये उद्यत हुए राजाओंका सामना करनेके लिये भीम और अर्जुनका उद्यत होना और उनके विषयमें भगवान् श्रीकृष्णका बलरामजीसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 188: द्रुपदको मारनेके लिये उद्यत हुए राजाओंका सामना करनेके लिये भीम और अर्जुनका उद्यत होना और उनके विषयमें भगवान् श्रीकृष्णका बलरामजीसे वार्तालाप  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.188.18 
तत् प्रेक्ष्य कर्मातिमनुष्यबुद्धि-
र्जिष्णु: स हि भ्रातुरचिन्त्यकर्मा।
विसिष्मिये चापि भयं विहाय
तस्थौ धनुर्गृह्य महेन्द्रकर्मा॥ १८॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन, जो देवराज इन्द्र के समान विलक्षण बुद्धि, पराक्रमी तथा अकल्पनीय कार्य करने वाले थे, अपने भाई भीमसेन का अद्भुत कार्य देखकर आश्चर्यचकित हो गए। उन्होंने सारा भय त्याग दिया और धनुष लेकर युद्ध के लिए तैयार हो गए।
 
Arjuna, who was of extraordinary wisdom and mighty like the king of gods Indra and had done unimaginable deeds, was astonished to see the amazing deed of his brother Bhimasena. He left all his fear and got ready for the battle with bow in his hand.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)