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mahabharat 1.188.11: 'हम द्रुपद को दण्ड देना चाहते हैं, जिससे हमारा अपमान न हो, हमारे धर्म की रक्षा हो तथा अन्य स्वयंवरों का भी यही हश्र न हो।'॥11॥   |   mahabharat अध्याय 1.188: द्रुपदको मारनेके लिये उद्यत हुए राजाओंका सामना करनेके लिये भीम और अर्जुनका उद्यत होना और उनके विषयमें भगवान् श्रीकृष्णका बलरामजीसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 188: द्रुपदको मारनेके लिये उद्यत हुए राजाओंका सामना करनेके लिये भीम और अर्जुनका उद्यत होना और उनके विषयमें भगवान् श्रीकृष्णका बलरामजीसे वार्तालाप  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.188.11 
अवमानभयाच्चैव स्वधर्मस्य च रक्षणात्।
स्वयंवराणामन्येषां मा भूदेवंविधा गति:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'हम द्रुपद को दण्ड देना चाहते हैं, जिससे हमारा अपमान न हो, हमारे धर्म की रक्षा हो तथा अन्य स्वयंवरों का भी यही हश्र न हो।'॥11॥
 
'We want to punish Drupada so that we are not insulted, our Dharma is protected and other Swayamvaras do not meet the same fate.'॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)