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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 187: अर्जुनका लक्ष्यवेध करके द्रौपदीको प्राप्त करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.187.6 
अवहास्या भविष्यन्ति ब्राह्मणा: सर्वराजसु।
कर्मण्यस्मिन्नसंसिद्धे चापलादपरीक्षिते॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'अपनी बालसुलभ चपलता के कारण उसने इस कार्य की कठिनाई पर विचार नहीं किया है। यदि वह इसमें सफल न हुआ तो सभी राजा ब्राह्मणों पर हँसेंगे।'
 
'Due to his childish agility he has not considered the difficulty of this task. If he does not succeed in this then all the kings will laugh at the Brahmins. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)