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mahabharat 1.187.4-5: 'ब्राह्मणो! यह अस्त्र-शस्त्र विद्या से रहित तथा शारीरिक बल की दृष्टि से अत्यन्त दुर्बल ब्राह्मण बालक, जिस धनुष को कर्ण और शल्य आदि महारथियों से युक्त, धनुर्वेद में पारंगत तथा झुकाने में भी समर्थ नहीं, उस पर प्रहार कैसे कर सकेगा? 4-5॥   |   mahabharat अध्याय 1.187: अर्जुनका लक्ष्यवेध करके द्रौपदीको प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 187: अर्जुनका लक्ष्यवेध करके द्रौपदीको प्राप्त करना  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  1.187.4-5 
यत् कर्णशल्यप्रमुखै: क्षत्रियैर्लोकविश्रुतै:।
नानतं बलवद्भिर्हि धनुर्वेदपरायणै:॥ ४॥
तत् कथं त्वकृतास्त्रेण प्राणतो दुर्बलीयसा।
वटुमात्रेण शक्यं हि सज्यं कर्तुं धनुर्द्विजा:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'ब्राह्मणो! यह अस्त्र-शस्त्र विद्या से रहित तथा शारीरिक बल की दृष्टि से अत्यन्त दुर्बल ब्राह्मण बालक, जिस धनुष को कर्ण और शल्य आदि महारथियों से युक्त, धनुर्वेद में पारंगत तथा झुकाने में भी समर्थ नहीं, उस पर प्रहार कैसे कर सकेगा? 4-5॥
 
'Brahmins! How can this innocent Brahmin boy, devoid of knowledge of weapons and extremely weak in terms of physical strength, be able to attack the same bow that a Kshatriya, who is strong in Karna and Shalya, is adept at Dhanurveda and is not even able to bend (even)? 4-5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)