Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.187.28: इस प्रकार अद्भुत कर्म करने वाले अर्जुन स्वयंवर सभा में द्रौपदी को जीतकर रंगभूमि से बाहर आए। उनकी पत्नी द्रौपदी उनके पीछे-पीछे चल रही थीं। उस समय उपस्थित ब्राह्मणों ने उनका बहुत ही गर्मजोशी से स्वागत किया॥ 28॥ | mahabharat अध्याय 1.187: अर्जुनका लक्ष्यवेध करके द्रौपदीको प्राप्त करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स तामुपादाय विजित्य रङ्गे
द्विजातिभिस्तैरभिपूज्यमान:।
रङ्गान्निरक्रामदचिन्त्यकर्मा
पत्न्या तया चाप्यनुगम्यमान:॥ २८॥
अनुवाद
इस प्रकार अद्भुत कर्म करने वाले अर्जुन स्वयंवर सभा में द्रौपदी को जीतकर रंगभूमि से बाहर आए। उनकी पत्नी द्रौपदी उनके पीछे-पीछे चल रही थीं। उस समय उपस्थित ब्राह्मणों ने उनका बहुत ही गर्मजोशी से स्वागत किया॥ 28॥
Arjuna, who performed amazing deeds, thus came out of the arena after winning the precious woman Draupadi in the Swayamvar Sabha. His wife Draupadi was following him. The Brahmins present at that time welcomed him very warmly.॥ 28॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि स्वयंवरपर्वणि लक्ष्यच्छेदने सप्ताशीत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १८७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत स्वयंवरपर्वमें लक्ष्यछेदनविषयक एक सौ सतासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८७॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ५ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ३३ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥