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mahabharat 1.187.25: अर्जुन को देखकर शत्रुसूदन द्रुपद के हर्ष की सीमा न रही, उन्होंने अपनी सेना लेकर उनकी सहायता करने का निश्चय किया॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 1.187: अर्जुनका लक्ष्यवेध करके द्रौपदीको प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 187: अर्जुनका लक्ष्यवेध करके द्रौपदीको प्राप्त करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.187.25 
तं दृष्ट्वा द्रुपद: प्रीतो बभूव रिपुसूदन:।
सह सैन्यैश्च पार्थस्य साहाय्यार्थमियेष स:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन को देखकर शत्रुसूदन द्रुपद के हर्ष की सीमा न रही, उन्होंने अपनी सेना लेकर उनकी सहायता करने का निश्चय किया॥ 25॥
 
On seeing Arjun, Shatrusudan Drupada's joy knew no bounds. He decided to help him with his army.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)