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mahabharat 1.187.21: और उन्होंने उन्हें दागकर तुरंत ही लक्ष्य को भेद दिया। लक्ष्य टुकड़े-टुकड़े होकर अचानक यंत्र के छेद से ज़मीन पर गिर पड़ा। उस समय आकाश में हर्ष की एक तेज़ ध्वनि गूंज उठी और सभा-भवन में उससे भी ज़्यादा हर्ष का शोर मच गया।   |   mahabharat अध्याय 1.187: अर्जुनका लक्ष्यवेध करके द्रौपदीको प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 187: अर्जुनका लक्ष्यवेध करके द्रौपदीको प्राप्त करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.187.21 
विव्याध लक्ष्यं निपपात तच्च
छिद्रेण भूमौ सहसातिविद्धम्।
ततोऽन्तरिक्षे च बभूव नाद:
समाजमध्ये च महान् निनाद:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
और उन्होंने उन्हें दागकर तुरंत ही लक्ष्य को भेद दिया। लक्ष्य टुकड़े-टुकड़े होकर अचानक यंत्र के छेद से ज़मीन पर गिर पड़ा। उस समय आकाश में हर्ष की एक तेज़ ध्वनि गूंज उठी और सभा-भवन में उससे भी ज़्यादा हर्ष का शोर मच गया।
 
And firing them he pierced the target in no time. The target shattered into pieces and suddenly fell to the ground through the hole in the instrument. At that time a loud sound of joy filled the sky and an even greater uproar of joy filled the assembly hall.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)