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mahabharat 1.187.18: तत्पश्चात, अर्जुन ने वर देने वाले भगवान शिव को प्रणाम करके अपना सिर झुकाया और मन में भगवान कृष्ण का ध्यान करते हुए धनुष उठा लिया।   |   mahabharat अध्याय 1.187: अर्जुनका लक्ष्यवेध करके द्रौपदीको प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 187: अर्जुनका लक्ष्यवेध करके द्रौपदीको प्राप्त करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.187.18 
प्रणम्य शिरसा देवमीशानं वरदं प्रभुम्।
कृष्णं च मनसा कृत्वा जगृहे चार्जुनो धनु:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात, अर्जुन ने वर देने वाले भगवान शिव को प्रणाम करके अपना सिर झुकाया और मन में भगवान कृष्ण का ध्यान करते हुए धनुष उठा लिया।
 
Thereafter, Arjuna bowed his head in obeisance to the boon-giving Lord Shiva and, meditating on Lord Krishna in his mind, picked up the bow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)