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mahabharat 1.186.7: राक्षस, सुपर्ण, नाग, देवर्षि, गुह्यक, चारण तथा विश्वावसु, नारद तथा पर्वत आदि प्रमुख गंधर्व अप्सराओं सहित अचानक आकाश में प्रकट हो गये। 7॥   |   mahabharat अध्याय 1.186: राजाओंका लक्ष्यवेधके लिये उद्योग और असफल होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 186: राजाओंका लक्ष्यवेधके लिये उद्योग और असफल होना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.186.7 
दैत्या: सुपर्णाश्च महोरगाश्च
देवर्षयो गुह्यकाश्चारणाश्च।
विश्वावसुर्नारदपर्वतौ च
गन्धर्वमुख्या: सहसाप्सरोभि:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
राक्षस, सुपर्ण, नाग, देवर्षि, गुह्यक, चारण तथा विश्वावसु, नारद तथा पर्वत आदि प्रमुख गंधर्व अप्सराओं सहित अचानक आकाश में प्रकट हो गये। 7॥
 
Demons, Suparna, Naga, Devarshi, Guhyak, Charan and the chief Gandharvas like Vishwavasu, Narad and Parvat etc. suddenly appeared in the sky along with the Apsaras. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)