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mahabharat 1.186.23: कर्ण को देखते ही द्रौपदी ने ऊंचे स्वर में कहा, "मैं सूत जाति के पुरुष से विवाह नहीं करूँगी।" यह सुनकर कर्ण ने क्रोध भरी मुस्कान के साथ सूर्यदेव की ओर देखा और प्रकाशमान धनुष छोड़ दिया॥23॥   |   mahabharat अध्याय 1.186: राजाओंका लक्ष्यवेधके लिये उद्योग और असफल होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 186: राजाओंका लक्ष्यवेधके लिये उद्योग और असफल होना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.186.23 
दृष्ट्वा तु तं द्रौपदी वाक्यमुच्चै-
र्जगाद नाहं वरयामि सूतम्।
सामर्षहासं प्रसमीक्ष्य सूर्यं
तत्याज कर्ण: स्फुरितं धनुस्तत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
कर्ण को देखते ही द्रौपदी ने ऊंचे स्वर में कहा, "मैं सूत जाति के पुरुष से विवाह नहीं करूँगी।" यह सुनकर कर्ण ने क्रोध भरी मुस्कान के साथ सूर्यदेव की ओर देखा और प्रकाशमान धनुष छोड़ दिया॥23॥
 
On seeing Karna, Draupadi said in a loud voice, "I will not marry a man belonging to the Suta caste." On hearing this, Karna looked at the Sun God with a resentful smile and let go of the luminous bow.॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)