श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 186: राजाओंका लक्ष्यवेधके लिये उद्योग और असफल होना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.186.21 
सर्वान् नृपांस्तान् प्रसमीक्ष्य कर्णो
धनुर्धराणां प्रवरो जगाम।
उद्‍धृत्य तूर्णं धनुरुद्यतं तत्
सज्यं चकाराशु युयोज बाणान्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उन सब राजाओं की यह दुर्दशा देखकर धनुर्धरों में श्रेष्ठ कर्ण ने धनुष के पास जाकर उसे उठाया, उस पर प्रत्यंचा चढ़ाई और शीघ्र ही उस पर पाँच बाण चढ़ा दिए॥*॥21॥
 
Seeing the plight of all those kings, Karna, the best among archers, went to the bow, picked it up, strung it and soon strung the five arrows on it.*॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)