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mahabharat 1.184.9: भरत के वंशज जनमेजय! पांचाल के राजा ने कुंतीपुत्र अर्जुन को पाने के लिए एक ऐसा शक्तिशाली धनुष बनाया जिसे कोई और मोड़ नहीं सकता था।   |   mahabharat अध्याय 1.184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.184.9 
सोऽन्वेषमाण: कौन्तेयं पाञ्चाल्यो जनमेजय।
दृढं धनुरनानम्यं कारयामास भारत॥ ९॥
 
 
अनुवाद
भरत के वंशज जनमेजय! पांचाल के राजा ने कुंतीपुत्र अर्जुन को पाने के लिए एक ऐसा शक्तिशाली धनुष बनाया जिसे कोई और मोड़ नहीं सकता था।
 
Bharata's descendant Janamejaya! The king of Panchala, in order to find Arjuna, the son of Kunti, made a bow so strong that no one else could bend it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)