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mahabharat 1.184.8: राजा द्रुपद के मन में सदैव यही इच्छा थी कि द्रौपदी का विवाह पाण्डुनन्दन अर्जुन से करें, परन्तु उन्होंने अपनी यह भावना किसी पर प्रकट नहीं की ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 1.184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.184.8 
यज्ञसेनस्य कामस्तु पाण्डवाय किरीटिने।
कृष्णां दद्यामिति सदा न चैतद् विवृणोति स:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
राजा द्रुपद के मन में सदैव यही इच्छा थी कि द्रौपदी का विवाह पाण्डुनन्दन अर्जुन से करें, परन्तु उन्होंने अपनी यह भावना किसी पर प्रकट नहीं की ॥8॥
 
King Drupada always had this desire in his mind to marry Draupadi to Pandunandan Arjun. But he did not reveal his feelings to anyone. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)