Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.184.7: वहाँ ब्राह्मण जीवन का आश्रय लेकर वे भिक्षा माँगते (और उसी से अपना निर्वाह करते) थे। इस प्रकार वहाँ पहुँचे हुए वीर पाण्डवों को कोई भी मनुष्य पहचान नहीं सकता था॥7॥ | mahabharat अध्याय 1.184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वहाँ ब्राह्मण जीवन का आश्रय लेकर वे भिक्षा माँगते (और उसी से अपना निर्वाह करते) थे। इस प्रकार वहाँ पहुँचे हुए वीर पाण्डवों को कोई भी मनुष्य पहचान नहीं सकता था॥7॥
There, taking the shelter of a brahmin's life, they would beg for alms (and survive on that). In this way, no human being could recognize the brave Pandavas who had reached there. ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥