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mahabharat 1.184.6: द्रुपद के नगर और उसकी सीमा-दीवारों को देखकर पाण्डवों ने उस समय एक कुम्हार के घर में अपने ठहरने की व्यवस्था की।   |   mahabharat अध्याय 1.184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.184.6 
ते तु दृष्ट्वा पुरं तच्च स्कन्धावारं च पाण्डवा:।
कुम्भकारस्य शालायां निवासं चक्रिरे तदा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
द्रुपद के नगर और उसकी सीमा-दीवारों को देखकर पाण्डवों ने उस समय एक कुम्हार के घर में अपने ठहरने की व्यवस्था की।
 
Having seen Drupada's city and its boundary walls, the Pandavas at that time arranged for their stay in the house of a potter.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)