Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.184.5: (प्रतिदिन) स्वाध्याय में तत्पर रहने वाले, शुद्धचित्त, मधुर स्वभाव वाले और प्रेमी पाण्डुकुमार इस प्रकार चलते हुए धीरे-धीरे पांचाल देश में पहुँचे ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.184.5 
स्वाध्यायवन्त: शुचयो मधुरा: प्रियवादिन:।
आनुपूर्व्येण सम्प्राप्ता: पञ्चालान् पाण्डुनन्दना:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
(प्रतिदिन) स्वाध्याय में तत्पर रहने वाले, शुद्धचित्त, मधुर स्वभाव वाले और प्रेमी पाण्डुकुमार इस प्रकार चलते हुए धीरे-धीरे पांचाल देश में पहुँचे ॥5॥
 
(Every day) Pandukumar, who was always active in self-study, was pure, had a sweet nature and was a lover, thus, by walking in this manner, he gradually reached the country of Panchal. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)