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mahabharat 1.184.4: महाबली पाण्डवों ने मार्ग में अनेक सुन्दर वन और सरोवर देखे और धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए प्रत्येक स्थान पर डेरा डाला॥4॥   |   mahabharat अध्याय 1.184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.184.4 
पश्यन्तो रमणीयानि वनानि च सरांसि च।
तत्र तत्र वसन्तश्च शनैर्जग्मुर्महारथा:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
महाबली पाण्डवों ने मार्ग में अनेक सुन्दर वन और सरोवर देखे और धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए प्रत्येक स्थान पर डेरा डाला॥4॥
 
The mighty Pandavas saw many beautiful forests and lakes on the way and camped at each place as they slowly moved forward.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)