Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.184.37: ऐसा कहकर द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न ने वहाँ आये हुए राजाओं के नाम, कुल और पराक्रम का वर्णन करते हुए अपनी बहन द्रौपदी से इस प्रकार कहा।   |   mahabharat अध्याय 1.184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.184.37 
तानेवमुक्त्वा द्रुपदस्य पुत्र:
पश्चादिदं तां भगिनीमुवाच।
नाम्ना च गोत्रेण च कर्मणा च
संकीर्तयन् भूमिपतीन् समेतान्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न ने वहाँ आये हुए राजाओं के नाम, कुल और पराक्रम का वर्णन करते हुए अपनी बहन द्रौपदी से इस प्रकार कहा।
 
Having said this, Dhrishtadyumna, the son of Drupada, narrating the names, clans and prowess of the kings who had come there, told his sister Draupadi as follows. 37.
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि स्वयंवरपर्वणि धृष्टद्युम्नवाक्ये चतुरशीत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १८४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत स्वयंवरपर्वमें धृष्टद्युम्नवाक्यविषयक एक सौ चौरासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)