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mahabharat 1.184.35: हे देश के राजाओं! जो यहाँ एकत्र हुए हो! तुम सब लोग मेरी बात सुनो। यह धनुष है, ये बाण हैं और यह लक्ष्य है। तुम सब लोग आकाश में छोड़े हुए अपने पाँच तीखे बाणों से उस यंत्र के छिद्र में से लक्ष्य को भेदकर उसे नीचे गिरा दो॥ 35॥   |   mahabharat अध्याय 1.184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.184.35 
इदं धनुर्लक्ष्यमिमे च बाणा:
शृण्वन्तु मे भूपतय: समेता:।
छिद्रेण यन्त्रस्य समर्पयध्वं
शरै: शितैर्व्योमचरैर्दशार्धै:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
हे देश के राजाओं! जो यहाँ एकत्र हुए हो! तुम सब लोग मेरी बात सुनो। यह धनुष है, ये बाण हैं और यह लक्ष्य है। तुम सब लोग आकाश में छोड़े हुए अपने पाँच तीखे बाणों से उस यंत्र के छिद्र में से लक्ष्य को भेदकर उसे नीचे गिरा दो॥ 35॥
 
'O kings of the land who have gathered here! All of you (pay attention) listen to me. This is the bow, these are the arrows and this is the target. All of you should pierce the target through the hole of that machine with the five sharp arrows that you have released in the sky and bring it down. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)