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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.184.32 
संतर्पयित्वा ज्वलनं ब्राह्मणान् स्वस्ति वाच्य च।
वारयामास सर्वाणि वादित्राणि समन्तत:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अग्निदेव को प्रसन्न करके ब्राह्मणों ने शुभ मन्त्र पढ़े और चारों ओर बज रहे सभी वाद्य बंद हो गए। 32.
 
In this way, after appeasing the god Agni, the Brahmins recited the auspicious mantras and all the musical instruments being played around were stopped. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)