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mahabharat 1.184.3: पांडवों ने उनका यथोचित स्वागत किया और उन्होंने भी उनका स्वागत किया। फिर उन्होंने आवश्यक वार्तालाप किया। वार्तालाप समाप्त होने पर, व्यास की अनुमति लेकर पांडव पुनः द्रुपद की राजधानी की ओर चल पड़े।   |   mahabharat अध्याय 1.184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.184.3 
तस्मै यथावत् सत्कारं कृत्वा तेन च सत्कृता:।
कथान्ते चाभ्यनुज्ञाता: प्रययुर्द्रुपदक्षयम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
पांडवों ने उनका यथोचित स्वागत किया और उन्होंने भी उनका स्वागत किया। फिर उन्होंने आवश्यक वार्तालाप किया। वार्तालाप समाप्त होने पर, व्यास की अनुमति लेकर पांडव पुनः द्रुपद की राजधानी की ओर चल पड़े।
 
The Pandavas welcomed him in the appropriate manner and he welcomed them. Then they had the necessary conversation. After the conversation was over, taking the permission of Vyasa, the Pandavas again left for the capital of Drupada.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)