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mahabharat 1.184.27: पाण्डव भी ब्राह्मणों के साथ उसी पंक्ति में बैठकर पांचालराज की उत्तम समृद्धि देख रहे थे॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 1.184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.184.27 
ब्राह्मणैस्ते च सहिता: पाण्डवा: समुपाविशन्।
ऋद्धिं पाञ्चालराजस्य पश्यन्तस्तामनुत्तमाम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
पाण्डव भी ब्राह्मणों के साथ उसी पंक्ति में बैठकर पांचालराज की उत्तम समृद्धि देख रहे थे॥ 27॥
 
The Pandavas too were sitting in the same row with the Brahmins, observing the excellent prosperity of the King of Panchala.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)