Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.184.21: नाना प्रकार की मालाएँ और हार उन भवनों की शोभा बढ़ा रहे थे। अगरबत्ती की सुगंध फैल रही थी। वे हंसों और चन्द्रमा की किरणों के समान श्वेत दिख रहे थे। उनके भीतर से निकल रही धूप की सुगंध एक योजन तक चारों ओर फैल रही थी। | mahabharat अध्याय 1.184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नाना प्रकार की मालाएँ और हार उन भवनों की शोभा बढ़ा रहे थे। अगरबत्ती की सुगंध फैल रही थी। वे हंसों और चन्द्रमा की किरणों के समान श्वेत दिख रहे थे। उनके भीतर से निकल रही धूप की सुगंध एक योजन तक चारों ओर फैल रही थी।
Many types of garlands and necklaces were adding to the beauty of those buildings. The fragrance of agarbatti was spreading. They looked white like swans and the rays of the moon. The fragrance of incense emanating from within them was spreading all around for a distance of one yojana.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥