Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.184.16: वहाँ बैठने की व्यवस्था शिशुमार के आकार में सजाई गई थी। शिशुमार के शीर्ष पर सभी राजा अपने-अपने मंच पर बैठे थे। स्वयंवर सभा के लिए मंच नगर के उत्तर-पूर्व कोने में एक सुंदर और समतल भूमि पर सजाया गया था, जो चारों ओर से सुंदर भवनों से घिरा होने के कारण अत्यंत सुंदर लग रहा था।   |   mahabharat अध्याय 1.184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.184.16 
शिशुमारशिर: प्राप्य न्यविशंस्ते स्म पार्थिवा:।
प्रागुत्तरेण नगराद् भूमिभागे समे शुभे।
समाजवाट: शुशुभे भवनै: सर्वतो वृत:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वहाँ बैठने की व्यवस्था शिशुमार के आकार में सजाई गई थी। शिशुमार के शीर्ष पर सभी राजा अपने-अपने मंच पर बैठे थे। स्वयंवर सभा के लिए मंच नगर के उत्तर-पूर्व कोने में एक सुंदर और समतल भूमि पर सजाया गया था, जो चारों ओर से सुंदर भवनों से घिरा होने के कारण अत्यंत सुंदर लग रहा था।
 
The seating arrangement there was decorated in the shape of Shishumar. All the kings were seated on their respective platforms at the head of Shishumar. The stage for the Swayamvar Sabha was decorated on a beautiful and flat ground in the north-east corner of the city, which was looking very beautiful as it was surrounded by beautiful buildings on all sides.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)