Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.184.12: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! जब राजा द्रुपद ने इस प्रकार स्वयंवर की घोषणा की, तब उसे सुनकर सब राजा उनकी राजधानी में एकत्र होने लगे॥12॥ | mahabharat अध्याय 1.184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
इति स द्रुपदो राजा स्वयंवरमघोषयत्।
तच्छ्रुत्वा पार्थिवा: सर्वे समीयुस्तत्र भारत॥ १२॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! जब राजा द्रुपद ने इस प्रकार स्वयंवर की घोषणा की, तब उसे सुनकर सब राजा उनकी राजधानी में एकत्र होने लगे॥12॥
Vaishmpayana says - Janamejaya! When king Drupada announced the swayamvara in this manner, then on hearing it all the kings began to assemble in his capital.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥