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mahabharat 1.184.11: द्रुपद ने घोषणा की, "केवल वही वीर पुरुष मेरी पुत्री को प्राप्त कर सकेगा जो इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा और यंत्र के छिद्र से इन प्रस्तुत बाणों से लक्ष्य को भेद देगा।"   |   mahabharat अध्याय 1.184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 184: पाण्डवोंका द्रुपदकी राजधानीमें जाकर कुम्हारके यहाँ रहना, स्वयंवरसभाका वर्णन तथा धृष्टद्युम्नकी घोषणा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.184.11 
द्रुपद उवाच
इदं सज्यं धनु: कृत्वा सज्जैरेभिश्च सायकै:।
अतीत्य लक्ष्यं यो वेद्धा स लब्धा मत्सुतामिति॥ ११॥
 
 
अनुवाद
द्रुपद ने घोषणा की, "केवल वही वीर पुरुष मेरी पुत्री को प्राप्त कर सकेगा जो इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा और यंत्र के छिद्र से इन प्रस्तुत बाणों से लक्ष्य को भेद देगा।"
 
Drupada announced, "Only the brave man who will string this bow and pierce the target with these presented arrows through the hole in the instrument will be able to get my daughter."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)