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mahabharat 1.183.15: उनके सब उपहार स्वीकार करके, स्वयंवर देखकर और उत्सव का आनन्द उठाकर, हम लोग अपने-अपने इच्छित स्थानों को चले जाएँगे॥ 15॥   |   mahabharat अध्याय 1.183: पाण्डवोंकी पंचालयात्रा और मार्गमें ब्राह्मणोंसे बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 183: पाण्डवोंकी पंचालयात्रा और मार्गमें ब्राह्मणोंसे बातचीत  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.183.15 
प्रतिगृह्य च तत् सर्वं दृष्ट्वा चैव स्वयंवरम्।
अनुभूयोत्सवं चैव गमिष्यामो यथेप्सितम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
उनके सब उपहार स्वीकार करके, स्वयंवर देखकर और उत्सव का आनन्द उठाकर, हम लोग अपने-अपने इच्छित स्थानों को चले जाएँगे॥ 15॥
 
After accepting all their gifts, seeing the Swayamvara and enjoying the festival, we will then go to our respective desired destinations.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)