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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 182: पाण्डवोंका धौम्यको अपना पुरोहित बनाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.182.11 
वीरांस्तु सहितान् मेने प्राप्तराज्यान् स्वधर्मत:।
बुद्धिवीर्यबलोत्साहैर्युक्तान् देवानिव द्विज:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
धौम्य को भी विश्वास था कि बुद्धि, वीरता, बल और उत्साह से संपन्न ये देवतुल्य योद्धा संगठित होकर अपने धर्म के अनुसार अपना राज्य अवश्य पुनः प्राप्त कर लेंगे।
 
Dhoumya too was confident that these god-like warriors endowed with wisdom, valour, strength and enthusiasm would organise themselves and certainly regain their kingdom according to their own Dharma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)