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mahabharat 1.182.10: उदार बुद्धि वाले धौम्य वेदार्थ के तत्त्वज्ञ थे, वे पाण्डवों के गुरु हुए। उन धर्मज्ञ ऋषि ने धर्मात्मा कुन्तीकुमारों को अपना यजमान बनाया ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 1.182: पाण्डवोंका धौम्यको अपना पुरोहित बनाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 182: पाण्डवोंका धौम्यको अपना पुरोहित बनाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.182.10 
स हि वेदार्थतत्त्वज्ञस्तेषां गुरुरुदारधी:।
तेन धर्मविदा पार्था याज्या धर्मविद: कृता:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उदार बुद्धि वाले धौम्य वेदार्थ के तत्त्वज्ञ थे, वे पाण्डवों के गुरु हुए। उन धर्मज्ञ ऋषि ने धर्मात्मा कुन्तीकुमारों को अपना यजमान बनाया ॥10॥
 
The liberal minded Dhaumya was a philosopher of Vedartha, he became the guru of Pandavas. That religious sage made the religious Kuntikumars his host. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)