Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.181.9-10: एक दिन भूख से व्याकुल होकर वह अपने लिए भोजन की तलाश में निकल पड़ा। बहुत कष्ट सहने के बाद उसने देखा कि वन के एक निर्जन भाग में एक ब्राह्मण और एक ब्राह्मणी मैथुन हेतु एकत्रित थे। वे अभी तक अपनी कामना पूरी नहीं कर पाए थे कि राक्षस ग्रस्त कल्माषपाद को देखकर वे अत्यन्त भयभीत होकर भाग गए। | mahabharat अध्याय 1.181: राजा कल्माषपादको ब्राह्मणी आंगिरसीका शाप । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एक दिन भूख से व्याकुल होकर वह अपने लिए भोजन की तलाश में निकल पड़ा। बहुत कष्ट सहने के बाद उसने देखा कि वन के एक निर्जन भाग में एक ब्राह्मण और एक ब्राह्मणी मैथुन हेतु एकत्रित थे। वे अभी तक अपनी कामना पूरी नहीं कर पाए थे कि राक्षस ग्रस्त कल्माषपाद को देखकर वे अत्यन्त भयभीत होकर भाग गए।
One day, troubled with hunger, he started looking for food for himself. After much suffering, he saw that in a secluded part of the forest, a Brahmin and a Brahmini were gathered for sexual intercourse. They had not yet been able to fulfill their desire, and on seeing the demon-possessed Kalmashpad, they fled away in great fear.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥