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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 181: राजा कल्माषपादको ब्राह्मणी आंगिरसीका शाप  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.181.6 
स तु शापवशं प्राप्त: क्रोधपर्याकुलेक्षण:।
निर्जगाम पुराद् राजा सहदार: परंतप:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं को कष्ट देने वाले राजा कल्माषपाद के शाप से ग्रस्त होकर वह अपनी पत्नी सहित नगर से बाहर गया था। उस समय उसकी आँखें क्रोध से भरी हुई थीं।
 
Under the curse of King Kalmashpad, who used to torment his enemies, he went out of the city with his wife. At that time his eyes were filled with anger.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)