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mahabharat 1.181.5: भरतश्रेष्ठ! वसिष्ठपुत्र महात्मा शक्ति द्वारा राजा कल्माषपाद को जिस प्रकार शाप दिया गया था, वह सम्पूर्ण कथा मैं आपसे कह चुका हूँ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.181: राजा कल्माषपादको ब्राह्मणी आंगिरसीका शाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 181: राजा कल्माषपादको ब्राह्मणी आंगिरसीका शाप  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.181.5 
कथितं ते मया सर्वं यथा शप्त: स पार्थिव:।
शक्तिना भरतश्रेष्ठ वासिष्ठेन महात्मना॥ ५॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! वसिष्ठपुत्र महात्मा शक्ति द्वारा राजा कल्माषपाद को जिस प्रकार शाप दिया गया था, वह सम्पूर्ण कथा मैं आपसे कह चुका हूँ॥5॥
 
Bharatshrestha! I have already told you the entire story of how King Kalmashpad was cursed by Vasistha's son Mahatma Shakti. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)