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mahabharat 1.180.9: हे शत्रुओं का नाश करने वाले अर्जुन! इसी प्रकार पुलस्त्य, पुलह, क्रतु और महाक्रुतु भी राक्षसों के प्राण बचाने के लिए वहाँ प्रकट हुए॥9॥   |   mahabharat अध्याय 1.180: पुलस्त्य आदि महर्षियोंके समझानेसे पराशरजीके द्वारा राक्षससत्रकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 180: पुलस्त्य आदि महर्षियोंके समझानेसे पराशरजीके द्वारा राक्षससत्रकी समाप्ति  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.180.9 
तथा पुलस्त्य: पुलह: क्रतुश्चैव महाक्रतु:।
तत्राजग्मुरमित्रघ्न रक्षसां जीवितेप्सया॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं का नाश करने वाले अर्जुन! इसी प्रकार पुलस्त्य, पुलह, क्रतु और महाक्रुतु भी राक्षसों के प्राण बचाने के लिए वहाँ प्रकट हुए॥9॥
 
Arjun, destroyer of enemies! Similarly, Pulastya, Pulah, Kratu and Mahakratu also appeared there to save the lives of the demons. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)