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mahabharat 1.180.13: 'पराशर! शान्त रहना ही (ब्राह्मणों का) श्रेष्ठ धर्म है, अतः उसी का पालन करो। श्रेष्ठ ब्राह्मण होकर भी तुम यह पापकर्म करते हो?॥13॥   |   mahabharat अध्याय 1.180: पुलस्त्य आदि महर्षियोंके समझानेसे पराशरजीके द्वारा राक्षससत्रकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 180: पुलस्त्य आदि महर्षियोंके समझानेसे पराशरजीके द्वारा राक्षससत्रकी समाप्ति  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.180.13 
शम एव परो धर्मस्तमाचर पराशर।
अधर्मिष्ठं वरिष्ठ: सन् कुरुषे त्वं पराशर॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'पराशर! शान्त रहना ही (ब्राह्मणों का) श्रेष्ठ धर्म है, अतः उसी का पालन करो। श्रेष्ठ ब्राह्मण होकर भी तुम यह पापकर्म करते हो?॥13॥
 
'Parashar! To remain calm is the best religion (of Brahmins), so follow that. Despite being a great Brahmin, you commit this sinful act?॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)