Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.18.d2: भगवान नारायण की वह साक्षात् माया हाथ में घड़ा लेकर अमृत पिलाने लगी। उस समय दैत्य और राक्षस पंक्तिबद्ध होकर बैठ गए, किन्तु देवी ने केवल देवताओं को ही अमृत दिया, दैत्यों को नहीं दिया, जिससे उनमें बड़ा उत्पात मच गया। | mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(सा तु नारायणी माया धारयन्ती कमण्डलुम्।
आस्यमानेषु दैत्येषु पङ्क्त्या च प्रति दानवै:।
देवानपाययद् देवी न दैत्यांस्ते च चुक्रुशु:॥ )
अनुवाद
भगवान नारायण की वह साक्षात् माया हाथ में घड़ा लेकर अमृत पिलाने लगी। उस समय दैत्य और राक्षस पंक्तिबद्ध होकर बैठ गए, किन्तु देवी ने केवल देवताओं को ही अमृत दिया, दैत्यों को नहीं दिया, जिससे उनमें बड़ा उत्पात मच गया।
That personified Maya of Lord Narayana started serving nectar with a pitcher in her hand. At that time, the demons and monsters sat in rows, but the goddess gave nectar to the gods only; she did not give it to the demons, due to which they created a big uproar.
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि आस्तीकपर्वणि अमृतमन्थनेऽष्टादशोऽध्याय:॥ १८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत आस्तीकपर्वमें अमृतमन्थनविषयक अठारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल ४८ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥