Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.18.d1-37: ब्रह्मन्! महामुने! वहाँ समस्त मनोरथों का फल देने वाला पारिजात वृक्ष और सुरभि गौ उत्पन्न हुई। तदनन्तर लक्ष्मी, सुरा, चन्द्रमा और मन के समान वेगवान ऊँचे उड़ने वाला घोड़ा, ये सभी सूर्य के मार्ग से आकाश में आश्रय लेकर देवताओं के निवासस्थान पर चले गए। 37॥ | mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्मन्! महामुने! वहाँ समस्त मनोरथों का फल देने वाला पारिजात वृक्ष और सुरभि गौ उत्पन्न हुई। तदनन्तर लक्ष्मी, सुरा, चन्द्रमा और मन के समान वेगवान ऊँचे उड़ने वाला घोड़ा, ये सभी सूर्य के मार्ग से आकाश में आश्रय लेकर देवताओं के निवासस्थान पर चले गए। 37॥
Brahman! Mahamune! There the Parijat tree, which gives the fruits of all desires, and the Surbhi cow were born. Then Lakshmi, Sura, Moon and the high-flying horse as fast as the mind, all of them took shelter in the sky on the path of the Sun, and went to the world where the gods reside. 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥