Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.18.9-10: तत्पश्चात् देवतागण उस पर्वत को लेकर समुद्रतट पर प्रकट हुए और समुद्र से बोले, ‘हम अमृत के लिए तुम्हारा मंथन करेंगे।’ यह सुनकर जल के स्वामी समुद्र ने कहा, ‘यदि अमृत में मेरा भी भाग हो तो मैं मन्दराचल को घुमाने का महान कष्ट सहन करूँगा।’॥9-10॥ | mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् देवतागण उस पर्वत को लेकर समुद्रतट पर प्रकट हुए और समुद्र से बोले, ‘हम अमृत के लिए तुम्हारा मंथन करेंगे।’ यह सुनकर जल के स्वामी समुद्र ने कहा, ‘यदि अमृत में मेरा भी भाग हो तो मैं मन्दराचल को घुमाने का महान कष्ट सहन करूँगा।’॥9-10॥
Thereafter the gods appeared on the seashore with that mountain and said to the ocean, 'We will churn you for nectar.' On hearing this the ocean, the lord of water, said, 'If I too have a share in the nectar, then I will bear the great pain of rotating Mount Mandara.'॥ 9-10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥