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mahabharat 1.18.8: ब्रह्म! तब महाबली अनन्त ने बड़े वेग से वन और वनवासी पशुओं सहित गिरिराज मन्दराचल को उखाड़ फेंका॥8॥   |   mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.18.8 
अथ पर्वतराजानं तमनन्तो महाबल:।
उज्जहार बलाद् ब्रह्मन् सवनं सवनौकसम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्म! तब महाबली अनन्त ने बड़े वेग से वन और वनवासी पशुओं सहित गिरिराज मन्दराचल को उखाड़ फेंका॥8॥
 
Brahman! Then the mighty Anant, with great force, uprooted Giriraj Mandarachal along with the forest and the forest-dwelling animals. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)