Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.18.6: उग्रश्रवाजी कहते हैं- भृगुनन्दन! देवताओं के ऐसा कहने पर ब्रह्माजी सहित भगवान विष्णु ने कहा- 'तथास्तु'। इसके बाद मन, बुद्धि और प्रमाण की पहुंच से परे भगवान विष्णु ने नागराज अनंत को मंदराचल को उखाड़ने की आज्ञा दी। 6॥ | mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उग्रश्रवाजी कहते हैं- भृगुनन्दन! देवताओं के ऐसा कहने पर ब्रह्माजी सहित भगवान विष्णु ने कहा- 'तथास्तु'। इसके बाद मन, बुद्धि और प्रमाण की पहुंच से परे भगवान विष्णु ने नागराज अनंत को मंदराचल को उखाड़ने की आज्ञा दी। 6॥
Ugrashravaji says – Bhrigunandan! When the gods said this, Lord Vishnu along with Brahmaji said - 'Tathastu (may it be so)'. Thereafter, Lord Vishnu, whose form is beyond the reach of mind, intellect and evidence, ordered Nagaraj Anant to uproot Mandarachal. 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥