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mahabharat 1.18.5: आप दोनों इस विषय में हमें शुभ एवं उत्तम बुद्धि प्रदान करें तथा हमारे हित के लिए मन्दराचल पर्वत को उखाड़ने का प्रयत्न करें।॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.18.5 
भवन्तावत्र कुर्वीतां बुद्धिं नै:श्रेयसीं पराम्।
मन्दरोद्धरणे यत्न: क्रियतां च हिताय न:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
आप दोनों इस विषय में हमें शुभ एवं उत्तम बुद्धि प्रदान करें तथा हमारे हित के लिए मन्दराचल पर्वत को उखाड़ने का प्रयत्न करें।॥5॥
 
‘You both should provide us with auspicious and good wisdom in this matter and for our benefit, please make efforts to uproot the Mandara mountain.’॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)