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mahabharat 1.18.46: सभी दैत्यों और दानवों ने उस मोहिनी पर अपना हृदय अर्पित कर दिया। उनके मन भ्रम से भर गए। इसलिए उन्होंने उस अमृत को स्त्री रूपी भगवान को सौंप दिया। 46।   |   mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  1.18.46 
ततस्तदमृतं तस्यै ददुस्ते मूढचेतस:।
स्त्रियै दानवदैतेया: सर्वे तद्‍गतमानसा:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
सभी दैत्यों और दानवों ने उस मोहिनी पर अपना हृदय अर्पित कर दिया। उनके मन भ्रम से भर गए। इसलिए उन्होंने उस अमृत को स्त्री रूपी भगवान को सौंप दिया। 46।
 
All the demons and devils sacrificed their hearts for that Mohini. Their minds were filled with confusion. So they all handed over that nectar to the Lord in the form of a woman. 46.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)