Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.18.44: ये सब अद्भुत वस्तुएँ देखकर दैत्यों का मन विचलित हो गया और उन्होंने अमृत तथा लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए देवताओं से घोर शत्रुता कर ली ॥ 44॥   |   mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  1.18.44 
एतत् तदद्‍भुतं दृष्ट्वा निराशा दानवा: स्थिता:।
अमृतार्थे च लक्ष्म्यर्थे महान्तं वैरमाश्रिता:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
ये सब अद्भुत वस्तुएँ देखकर दैत्यों का मन विचलित हो गया और उन्होंने अमृत तथा लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए देवताओं से घोर शत्रुता कर ली ॥ 44॥
 
After seeing all these wonderful things, the demons became disheartened and for the sake of nectar and goddess Lakshmi they entered into a great enmity with the gods. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)