Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.18.41: तत्पश्चात् बड़े वेग से मन्थन करने से महाविष कालकूट उत्पन्न हुआ, जो धुएँ से भरी हुई अग्नि के समान सहसा सम्पूर्ण जगत् को अपने में समाहित करके जलाने लगा ॥ 41॥ | mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अतिनिर्मथनादेव कालकूटस्तत: पर:।
जगदावृत्य सहसा सधूमोऽग्निरिव ज्वलन्॥ ४१॥
अनुवाद
तत्पश्चात् बड़े वेग से मन्थन करने से महाविष कालकूट उत्पन्न हुआ, जो धुएँ से भरी हुई अग्नि के समान सहसा सम्पूर्ण जगत् को अपने में समाहित करके जलाने लगा ॥ 41॥
Thereafter, by churning with great force, the great poison Kalakuta was produced. Like a smoke-filled fire, it suddenly engulfed the entire world and began burning it. ॥ 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥