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mahabharat 1.18.40: तत्पश्चात् चार दाँतों से विभूषित विशाल श्वेत सर्प ऐरावत प्रकट हुआ और वज्रधारी इन्द्र ने उसे अपने वश में कर लिया ॥40॥   |   mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  1.18.40 
श्वेतैर्दन्तैश्चतुर्भिस्तु महाकायस्तत: परम्।
ऐरावतो महानागोऽभवद् वज्रभृता धृत:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् चार दाँतों से विभूषित विशाल श्वेत सर्प ऐरावत प्रकट हुआ और वज्रधारी इन्द्र ने उसे अपने वश में कर लिया ॥40॥
 
Thereafter the huge white serpent Airavat appeared, adorned with four teeth and the thunderbolt-wielding Indra took him under his control. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)