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mahabharat 1.18.38: इसके बाद भगवान धन्वन्तरि दिव्य शरीर धारण कर प्रकट हुए। उनके हाथ में अमृत से भरा एक श्वेत कलश था। 38.   |   mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  1.18.38 
धन्वन्तरिस्ततो देवो वपुष्मानुदतिष्ठत।
श्वेतं कमण्डलुं बिभ्रदमृतं यत्र तिष्ठति॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद भगवान धन्वन्तरि दिव्य शरीर धारण कर प्रकट हुए। उनके हाथ में अमृत से भरा एक श्वेत कलश था। 38.
 
After this, Lord Dhanvantari appeared with a divine body. He was holding a white pot in his hand which was filled with nectar. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)