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mahabharat 1.18.36: तत्पश्चात् उस जल से अनन्त किरणों से प्रकाशित दिव्य कौस्तुभमणि प्रकट हुई, जो भगवान नारायण के वक्षस्थल पर शोभायमान हुई॥36॥   |   mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  1.18.36 
कौस्तुभस्तु मणिर्दिव्य उत्पन्नो घृतसम्भव:।
मरीचिविकच: श्रीमान् नारायण उरोगत:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उस जल से अनन्त किरणों से प्रकाशित दिव्य कौस्तुभमणि प्रकट हुई, जो भगवान नारायण के वक्षस्थल पर शोभायमान हुई॥36॥
 
Then the divine Kaustubhamani, bright with infinite rays, emerged from that water, which adorned the chest of Lord Narayana. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)