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mahabharat 1.18.35: तत्पश्चात् श्वेत वस्त्रधारी लक्ष्मीदेवी उस जल से घृत रूप में प्रकट हुईं। तत्पश्चात् सुरदेवी और श्वेत अश्व प्रकट हुए॥35॥   |   mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.18.35 
श्रीरनन्तरमुत्पन्ना घृतात् पाण्डुरवासिनी।
सुरादेवी समुत्पन्ना तुरग: पाण्डुरस्तथा॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् श्वेत वस्त्रधारी लक्ष्मीदेवी उस जल से घृत रूप में प्रकट हुईं। तत्पश्चात् सुरदेवी और श्वेत अश्व प्रकट हुए॥35॥
 
Thereafter, Lakshmidevi, dressed in white, appeared from that water in the form of Ghritva. After this Suradevi and the white horse appeared. 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)