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mahabharat 1.18.34: फिर उस समुद्र से सूर्य के समान उज्ज्वल, अनन्त किरणों वाला, शीतल प्रकाश से युक्त, श्वेत वर्ण वाला और प्रसन्न चन्द्रमा प्रकट हुआ॥34॥   |   mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.18.34 
तत: शतसहस्रांशुर्मथ्यमानात्तु सागरात्।
प्रसन्नात्मा समुत्पन्न: सोम: शीतांशुरुज्ज्वल:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
फिर उस समुद्र से सूर्य के समान उज्ज्वल, अनन्त किरणों वाला, शीतल प्रकाश से युक्त, श्वेत वर्ण वाला और प्रसन्न चन्द्रमा प्रकट हुआ॥34॥
 
Then from that ocean appeared the moon, as bright as the sun with infinite rays, full of cool light, white in color and happy. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)