Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.18.33: उग्रश्रवाजी कहते हैं - शौनकजी! भगवान नारायण के वचन सुनकर देवताओं और दानवों का बल बढ़ गया। वे सब मिलकर पुनः बड़े वेग से समुद्र का मंथन करने लगे और समस्त जल को क्षुब्ध कर दिया। 33. | mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उग्रश्रवाजी कहते हैं - शौनकजी! भगवान नारायण के वचन सुनकर देवताओं और दानवों का बल बढ़ गया। वे सब मिलकर पुनः बड़े वेग से समुद्र का मंथन करने लगे और समस्त जल को क्षुब्ध कर दिया। 33.
Ugrasravaji says - Shaunakji! On hearing the words of Lord Narayana, the strength of the gods and demons increased. All of them together again started churning the water of the ocean with great force and agitated the entire water. 33.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥